505th Kabir Parmeshwar Nirwan Diwas 2023

आज इस लेख में हम जानेंगे कि कबीर साहेब जी भक्तिकाल के सुप्रसिद्ध कवि वास्तव में कौन थे? जानिए 1 फरवरी कबीर परमेश्वर जी के 505वें निर्वाण दिवस 2023 (nirwan diwas 2023) के उपलक्ष्य पर विस्तृत जानकारी।

कबीर साहेब जी के जीवन से जुड़े कुछ तथ्य:-

कबीर साहेब जी कलयुग में भारत के काशी शहर के लहरतारा तालाब में ज्येष्ठ मास शुक्ल पूर्णमासी विक्रम संवत 1455 (सन् 1398) सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए थे।

“पांच तत्व की देह न मेरी, ना कोई माता जाया ।
जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया ।।”

कबीर परमात्मा

“साहेब होकर उतरे, बेटा काहू का नाहीं।
जो बेटा होकर उतरे, वो साहेब भी नाहीं।।”

कबीर परमात्मा

आदरणीय गरीबदास जी महाराज की अमृतवाणी:-

“जाती मेरी जगतगुरु, परमेश्वर है पंथ।
गरीबदास लिखित पढ़े, नाम निरंजन कंत।।”
“हे स्वामी सृस्टा में, सृस्टि मेरे तीर।
दास गरीब अधर बसूं, अविगत सत कबीर।।”

लहरतारा तालाब पर नीरू नीमा प्रतिदिन नहाने जाया करते थे। एक दिन ब्रह्म मुहूर्त में दोनों स्नान करने गए थे। नीमा की दृष्टि एक कमल के फूल पर पड़ी जिस पर कोई वस्तु हिल रही थी। उसने सोचा कहीं यह सर्प ना हो जो मेरे पति को न डस ले। ध्यानपूर्वक देखा तो वह सर्प नहीं कोई बालक था। जिसने एक पैर अपने मुख में ले रखा था तथा दूसरे को हिला रहा था।

नीमा ने अपने पति को कहा देखो जी एक छोटा बच्चा कमल के फूल पर लेटा है। वह जल में डूब न जाए।
नीमा की आवाज सुनकर देखा तो कमल के फूल पर एक नवजात शिशु को देखकर नीरू ने झपट कर कमल के फूल सहित बच्चा उठाकर अपनी पत्नी को दे दिया। नीमा ने बालक को सीने से लगाया, मुख चूमा, पुत्रवत प्यार किया। जिस परमेश्वर की खोज में ऋषि-मुनियों ने जीवन भर शास्त्र विरूद्ध साधना की, उन्हें वह नहीं मिला। वहीं परमेश्वर नीमा की गोद में खेल रहा था। उस समय जो आनन्द का अनुभव नीमा को हो रहा होगा उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। उसके बाद बच्चे को अपने घर लेकर गए तो देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।

“काशी उमटी गुल भया मोमन का घर घेर।
कोई कहे ब्रह्मा विष्णु है, कोई कहे इंद्र कुबेर।।”

Garibdas ji Maharaj

बच्चे का नाम रखने के लिए मुल्ला काजी आते हैं काजियों ने पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे। काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पृष्ठों पर भी कबीर-कबीर-कबीर अक्षर ही लिखा था। काजियों ने पूरी कुरान का निरीक्षण किया तो उनके द्वारा लाई गई कुरान शरीफ में सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। काजी बोले इस बालक ने कोई जादू मंत्र करके हमारी कुरान शरीफ को ही बदल डाला। तब कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले हे काशी के काजियों। मैं कबीर अल्लाह अर्थात अल्लाहु अकबर हूं। मेरा नाम “कबीर” ही रखो। काजियों ने अपने साथ लाई कुरान को वहीं पटक दिया तथा चले गए। 25 दिन तक बच्चे रूप मैं परमात्मा ने दूध नही पिया तो नीमा बहुत चिंतित हुई उधर से शिव जी साधु का भेष बनाकर नीमा के घर आए। नीमा रो-रोकर पागल हो रही थी। साधु ने पूछा माता क्या परेशानी है तब नीमा ने कहा महाराज यह बच्चा 25 दिन से कुछ आहार नहीं कर रहा है। साधु ने बच्चे को देखा तो उनकी चर्चा हुई बच्चे रूप में परमेश्वर ने कहा कि इनको कहो एक कुंवारी गाय लाये मैं उसका दूध पियूंगा।
नीरू एक गाय लाया और एक साफ बर्तन लाया और गाय के नीचे रख दिया तो गाय ने अपने आप ही दूध दिया। तब परमात्मा ने उस दूध को पिया और उनकी परवरिश हुई।

कबीर परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं इस का प्रमाण पवित्र वेद भी देते हैं:-

ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 देता है कि जब पूर्ण परमात्मा शिशु रूप धारण करके पृथ्वी पर आता है तो उसका पालन पोषण कुंवारी गाय से होता है।

“अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनव: शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे”

नीरू नीमा पर कुछ कर्ज हो चुका था। कुछ दिन तक कर्ज ना चुकाने पर यातना देने की धमकी सेठ ने दे डाली। दोनों पति-पत्नी अति चिंतित हो गए। माता-पिता को चिंतित देख बालक बोला हे माता-पिता ! आप चिंता न करो। आपको प्रतिदिन एक सोने की मोहर (दस ग्राम स्वर्ण) पालने के बिछौने के नीचे मिलेगी। आप अपना कर्ज उतार कर अपना तथा गौ का खर्च निकाल कर शेष बचे धन को धर्म कर्म में लगाना। उस दिन के पश्चात दस ग्राम स्वर्ण प्रतिदिन नीरू के घर परमेश्वर कबीर जी की कृपा से मिलने लगा। यह क्रिया एक वर्ष तक चलती रही।

“चारों युग में मेरे संत पुकारे, कुक कहा हम हेल रे।
हिरे माणिक मोती बरसे, ये जग चुगता ढेल रे।।”

बीर परमात्मा

परमात्मा कबीर साहेब चारों युगों में आते हैं। अच्छी आत्माओं को मिलते हैं। भक्ति की सही जानकारी बताते हैं।

कबीर परमेश्वर द्वारा काशी से सह-शरीर सतलोक प्रस्थान करने का लीला करना:-

कबीर परमात्मा 120 वर्ष इस मृत्यु लोक में रहने के बाद मगहर से सह-शरीर सतलोक गमन किया।।
कबीर परमेश्वर माघ माह शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी विक्रम संवत 1575 (सन 1518) को मगहर से सह-शरीर सतलोक गये तो उनके शरीर के बराबर सुगंधित फूल मिले थे वहाँ पर परमात्मा का शरीर नहीं मिला था। जिसे हिन्दू व मुसलमानों ने आपस में आधे – आधे बाँटकर यादगार रूप में हिन्दुओं ने मंदिर और मुसलमानों ने मजार बना ली तथा हिंदुओं ने कुछ फूल ले जाकर काशी में कबीर चौरा बना दिया गया।

कबीर परमेश्वर द्वारा काशी से सह-शरीर सतलोक प्रस्थान करने का अमृतवाणी:-

“तहां वहां अविगत फूल सुवासी, मगहर घोर और चौरा काशी।”

“कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।
दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।”

संत गरीबदास जी महाराज

कबीर परमेश्वर जी के 505वें Nirwan Diwas 2023 पर पढ़ें अद्भुत तथ्य :-

  • कबीर परमात्मा जब सह-शरीर सतलोक जा रहें थे तो परमात्मा ने बहुत बड़ा गृहयुद्ध टाला था जो कि पहले से उस समय भविष्यवक्ताओं ने भविष्यवाणी कर रखी थी।।
  • उस समय वहाँ एक गलत धारणा फैली थी की जो काशी में मरता है वो स्वर्ग जाता है और जो मगहर में मरता है वह नरक जाता है इस धारणा को उन्होंने खत्म कर दिया और वो अपने सत्संगों में कहते थे की भक्ति करने वाला प्राणी कहीं भी मृत्यु को प्राप्त होगा वह इष्टदेव के पास जाता और ना भक्ति करने वाला जीव कहीं भी मरता है तो वह सीधा नरक को जाता है।

कबीर परमेश्वर अपनी में कहते हैं कि:-

“भूमि भरोसे डूब है, कलपत है दोउ दीन। पूर्णब्रह्म सबके गुरु, मगहर भये लौलीन।।”

  • कबीर परमेश्वर को अंतिम समय में जब स्नान करना था तब पानी की कमी हो गयी थी तो परमात्मा ने पूछा कि कोई आस पास में नदी है क्या? राजाओं ने कहा एक आमी नदी तो है लेकिन वह शिव जी के श्राप से सुखी हुईं है।।
    परमात्मा आमी-नदी के समीप गए और उस नदी में जाकर अपने हाथों से इसारा कर दिया जिसके कारण एक विस्फोट होने की आवाज हुई और वो नदी फिर से प्रवाहित होने लगी।। (यह नदी आज भी मगहर में विद्द्मान है)
  • किसी भी दो धर्म या मजहबों में लड़ाई होना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन जब से कबीर परमेश्वर जी निर्वाण किए (सह-शरीर सतलोक गए) तब से आज तक मगहर में धर्म के नाम पर लड़ाई नही हुई है और आज भी वहाँ दोनों धर्मों के बीच आपसी प्रेम बना हुआ है।
  • कबीर परमेश्वर जब तक इस धरा पर रहें तब तक धर्म और जाती के नाम पर होने वाले लड़ाई को खत्म करने का प्रयास किया और कई अंधविश्वास को भी जड़ से समाप्त करने का प्रयास किया था। जिसके कारण उन्हें पंडित व काजियों द्वारा कई बार मारने का प्रयास किया गया था लेकिन वो स्वयं परमात्मा थे मरे नहीं और सबको माफ किया।।
    आज संत रामपाल जी महाराज जो कि परमेश्वर कबीर जी के अवतार उनके साथ भी यही हुआ।
  • कुछ साहित्यकारों की माने तो अगर आज स्वयं कबीर परमेश्वर होते तो ना जाने उन पर कितने केस लग जाते और वो जेल में होते।।
    ये इन लोगों का मानना गलत नहीं हैं जो ज्ञान कबीर परमेश्वर 600+ वर्ष पहले बताया करते थे। वही ज्ञान संत रामपाल जी महाराज कबीर परमेश्वर के अवतार बता रहे हैं और उनपर भी सैकड़ों केस लगा कर जेल में बंद कर दिया गया है।।

वर्तमान में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज कबीर परमेश्वर जी के अवतार आये हुए हैं उनसे नाम दीक्षा लें और अपना कल्याण करवाएं।

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