संत गरीबदास जी महाराज बोध दिवस 2024

21  मार्च 2024 को संत गरीबदास जी महाराज का बोध दिवस (sant garibdas ji maharaj bodh diwas 2024) है। तीन शताब्दी पूर्व परमेश्वर कबीर साहेब ने ज़िंदा बाबा के रूप में प्रकट होकर संत गरीबदास जी महाराज जी को 10 वर्ष की आयु में ज्ञान उपदेश दिया।

Notice:- 21 मार्च 2024, हिन्दू कैलेंडर के अनुसार विक्रम संवत 2078 फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को संत गरीब दास जी का बोध दिवस है। 295 वर्ष पहले परमेश्वर कबीर साहेब ने पृथ्वी पर प्रकट होकर संत गरीबदास जी महाराज को 10 वर्ष की आयु में दर्शन दिए और ज्ञान उपदेश दिया। 

संत गरीबदास जी महाराज का संछिप्त जीवन परिचय।

संत गरीबदास (Garibdas) जी का जन्म हरियाणा के जिला झज्जर गांव छुड़ानी में सन् 1717 (विक्रमी संवत 1774) में जाटों के एक प्रसिद्ध धनखड़ परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री बलराम जी मूल रूप से हरियाणा प्रांत के रोहतक जिले के करोंथा गाँव के रहने वाले थे। उनकी माता श्रीमती रानीदेवी जी छुड़ानी निवासी श्री शिवलाल सिहाग जी की पुत्री थी।

श्री शिवलाल जी के कोई पुत्र नहीं होने के कारण संत गरीबदास जी के पिता उनके नाना जी के पास छुड़ानी गांव में ही घरजवाँई के रूप में रहने लगे थे। पहले उनके पिता उनके नाना जी की 2500 बीघा (1400 एकड़) भूमि के अकेले वारिस थे और बाद में इकलौते पुत्र संत गरीबदास जी। बचपन से ही गरीबदास (Garibdas Ji Maharaj) जी अपने पिता की 150 गायों को चरानें ग्वालों के साथ जाते थे ।

आदरणीय गरीबदास (Garibdas Ji Maharaj) साहेब जी का आविर्भाव सन् 1717 में हुआ, तथा साहेब कबीर जी के दशर्न दस वर्ष की आयु में सन् 1727 में नला नामक खेत में हुए तथा सतलोक वास सन् 1778 में हुआ। आदरणीय गरीबदास साहेब जी (Garibdas Ji Maharaj)  को भी परमात्मा कबीर साहेब जी सशरीर जिंदा रूप में मिले।आदरणीय गरीबदास (Garibdas Ji Maharaj) साहेब जी अपने नला नामक खेतों में अन्य साथी ग्वालों के साथ गाय चरा रहे थे। जो खेत कबलाना गाँव की सीमा से सटा है।

ग्वालों ने जिन्दा महात्मा के रूप में प्रकट कबीर परमेश्वर से आग्रह किया कि आप खाना नहीं खाते हो तो दूध ग्रहण करो क्योंकि परमात्मा ने कहा था कि मैं अपने सतलोक गाँव से खाना खाकर आया हूँ। तब परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि मैं कुँआरी गाय का दूध पीता हूँ। बालक गरीबदास जी ने एक कुँआरी गाय को परमेश्वर कबीर जी के पास लाकर कहा कि बाबा जी यह बिना ब्याई (कुँआरी) गाय कैसे दूध दे सकती है?

तब कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने कुँआरी गाय अथार्त् बच्छिया की कमर पर हाथ रखा, अपने आप कुँआरी गाय (अध्नया धेनु) के थनों से दूध निकलने लगा। पात्र भरने पर रूक गया। वह दूध परमेश्वर कबीर जी ने पीया तथा प्रसाद रूप में कुछ अपने बच्चे गरीबदास जी को पिलाया तथा सतलोक के दशर्न कराये। सतलोक में अपने दो रूप दिखाकर फिर जिंदा वाले रूप में कुल मालिक रूप में सिंहासन पर विराजमान हो गए तथा कहा कि मैं ही 120 वषर् तक काशी में धाणक (जुलाहा) रूप में रहकर आया हूँ।

मैं पहले भी हजरत मुहम्मद जी को भी मिला था। पवित्रा कुरान शरीफ में जो कबीरा, कबीरन्, खबीरा, खबीरन्, अल्लाहु अक्बर आदि शब्द हैं वे मेरा ही बोध कराते हैं तथा मैं ही श्री नानक जी को बेई नदी पर जिंदा महात्मा के रूप में ही मिला था {मुस्लमानों में जिंदा महात्मा होते हैं, वे काला चैगा (ओवर कोट जैसा) घुटनों से नीचे तक तथा सिर पर चोटे वाला काला टोप पहनते हैं} तथा मैं ही बलख शहर में नरेश श्री अब्राहीम सुलतान अधम जी तथा श्री दादू जी को मिला था तथा चारों पवित्र वेदों में जो कविर अग्नि, कविर्देव (कविरंघारिः) आदि नाम हैं वह मेरा ही बोध है।

‘कबीर बेद हमारा भेद है, मैं मिलु बेदों से नांही।
जौन बेद से मैं मिलूं, वो बेद जानते नांही।।‘

Sant Garibdas Ji Maharaj

मैं ही वेदों से पहले भी सतलोक में विराजमान था। (गाँव छुड़ानी जि. झज्जर (हरियाणा) में आज भी उस जंगल में जहाँ पूणर् परमात्मा, का सन्त गरीबदास जी को मानव शरीर में साक्षात्कार हुआ था, एक यादगार विद्यमान है।) आदरणीय गरीबदास (Garibdas) जी की आत्मा अपने परमात्मा कबीर बन्दी छोड़ के साथ चले जाने के बाद उन्हें मृत जान कर चिता पर रख कर जलाने की तैयारी करने लगे, उसी समय आदरणीय गरीबदास साहेब जी की आत्मा को पूणर् परमेश्वर ने शरीर में प्रवेश कर दिया। दस वषीर्य बालक गरीब दास जीवित हो गए। उसके बाद उस पूर्ण परमात्मा का आँखों देखा विवरण अपनी अमृत वाणी में ‘‘अमर ग्रंथ सद्ग्रन्थ‘‘ नाम से ग्रन्थ की रचना की। उसी अमृत वाणी में प्रमाण:

अजब नगर में ले गया, हमकूं सतगुरु आन।
झिलके बिम्ब अगाध गति, सूते चादर तान।।
अनन्त कोटि ब्रह्मण्ड का एक रति नहीं भार।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं कुल के सृजन हार।।
गैबी ख्याल विशाल सतगुरु, अचल दिगम्बर थीर है।
भक्ति हेत काया धर आये, अविगत सत् कबीर हैं।।
हरदम खोज हनोज हाजर, त्रिवैणी के तीर हैं।
दास गरीब तबीब सतगुरु, बन्दी छोड़ कबीर हैं।।
हम सुल्तानी नानक तारे, दादू कूं उपदेश दिया।
जात जुलाहा भेद नहीं पाया, काशी माहे कबीर हुआ।।
सब पदवी के मूल हैं, सकल सिद्धि हैं तीर।
दास गरीब सतपुरुष भजो, अविगत कला कबीर।।
जिंदा जोगी जगत् गुरु, मालिक मुरशद पीर।
दहूँ दीन झगड़ा मंड्या, पाया नहीं शरीर।।
गरीब जिस कूं कहते कबीर जुलाहाा।
सब गति पूर्ण अगम अगाहा।।

Sant Garibdas Ji Maharaj

उपरोक्त वाणी में आदरणीय गरीबदास (garibdas) साहेब जी महाराज ने स्पष्ट कर दिया कि काशी वाले धाणक (जुलाहे) ने मुझे भी नाम दान देकर पार किया, यही काशी वाला धाणक ही (सतपुरुष) पूणर् ब्रह्म है। परमेश्वर कबीर ही सतलोक से जिन्दा महात्मा के रूप में आकर मुझे अजब नगर (अद्धभुत नगर सतलोक) में लेकर गए। जहाँ पर आनन्द ही आनन्द है, कोई चिन्ता नहीं, जन्म-मृत्यु, अन्य प्राणियों के शरीर में कष्ट आदि का शोक नहीं है। इसी काशी में धाणक रूप में आए सतपुरुष ने भिन्न-भिन्न समय में प्रकट होकर

  • आदरणीय श्री अब्राहीम सुल्तान अधम साहेब जी
  • आदरणीय दादू साहेब जी
  • आदरणीय नानक साहेब जी को भी सतनाम देकर पार किया।

वही कविदेर्व जिसके एक रोम कूप में करोड़ो सूयोर्ं जैसा प्रकाश है तथा मानव सदृश है, अति तेजोमय अपने वास्तविक शरीर के ऊपर हल्के तेजपुंज का चोला (भद्रा वस्त्रा अथार्त् तेजपुंज का शरीर) डाल कर हमें मृत्य लोक (मनुष्य लोक) में मिलता है। क्योंकि उस परमेश्वर के वास्तविक स्वरूप के प्रकाश को चमर् दृष्टि सहन नहीं कर सकती।

Sant Garibdas Ji Maharaj Bodh Diwas 2024
Image Source – Spiritual Leader Sant Rampal Ji Maharaj

संत गरीबदास जी महाराज के बोध दिवस 2024 के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रम

  • रक्तदान शिविर
  • दहेज़ मुक्त रमैनी(विवाह)
  • निःशुल्क नामदीक्षा
  • 3 दिनों तक अखंड (24 घंटे) व विशाल भंडारा
  • संत गरीबदास जी महाराज जी की अमरवाणी का अखंड पाठ
  • अखंड ज्योति यज्ञ किया जायेगा

नोट:- सतलोक आश्रम धनाना धाम में दन्त व नेत्र के लिए निःशुल्क शिविर लगाया जा रहा है, जिसमे अनुभवी चिकित्सकों द्वारा जाँच व इलाज किया जायेगा।

संत गरीबदास जी महाराज का बोध दिवस के आयोजन स्थल हैं

  1. सतलोक आश्रम धनाना धाम (हरियाणा)
  2. सतलोक आश्रम भिवानी (हरियाणा)
  3. सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र  (हरियाणा)
  4. सतलोक आश्रम धुरी (पंजाब)
  5. सतलोक आश्रम खमाणों (पंजाब)
  6. सतलोक आश्रम मुंडका (दिल्ली)
  7. सतलोक आश्रम शामली (उत्तर प्रदेश)
  8. सतलोक आश्रम बैतूल (मध्य प्रदेश)
  9. सतलोक आश्रम सोजत (राजस्थान)
  10. सतलोक आश्रम धनुषा (नेपाल)

जिसमें संपूर्ण विश्व को न्यौता दिया गया है। इच्छुक श्रद्धालु अपने नजदीकी सतलोक आश्रम में उपस्थित होकर इसका लाभ उठा सकते हैं। इस समागम का लाइव प्रसारण “Spiritual leader Sant Rampal Ji Maharaj फेसबुक पेज व यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी किया जायेगा।

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